हिन्दी लोकवाणी 10वी
अनुक्रमणिका
पहली इकाई
|
अ.क्र. |
पाठ का नाम |
विधा |
रचनाकार |
|
१. |
सोंधी सुगंध |
गीत |
डॉ. कृपाशंकर शर्मा 'अचूक' |
|
२. |
खोया हुआ आदमी |
वर्णनात्मक कहानी |
सुशांत सुप्रिय |
|
३. |
सफर का साथी और सिरदर्द |
हास्य-व्यंग्य निबंध |
रामनारायण उपाध्याय |
|
४. |
जिन ढूँढा |
दोहे |
संत कबीर |
|
५. |
अनोखे राष्ट्रपति |
संस्मरण |
महादेवी वर्मा |
|
६. |
ऐसा भी होता है (पठनार्थ) |
हाइकु |
अभिषेक जैन |
|
७. |
दो लघुकथाएँ |
लघुकथा |
संतोष सुपेकर |
|
८. |
कर्मवीर |
प्रेरक कविता |
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' |
दूसरी इकाई
|
अ.क्र. |
पाठ का नाम |
विधा |
रचनाकार |
|
१. |
मातृभूमि |
कविता |
मैथिलीशरण गुप्त |
|
२. |
कलाकार |
संवादात्मक कहानी |
राजेंद्र यादव |
|
३. |
मुकदमा |
एकांकी |
गोविंद शर्मा |
|
४. |
दो गजलें |
गजल |
राजेश रेड्डी |
|
५. |
चार हाथ चाँदना (पठनार्थ) |
साक्षात्कार |
अमृता प्रीतम |
|
६. |
अति सोहत स्याम जू |
सवैया |
रसखान |
|
७. |
प्रकृति संवाद |
ललित निबंध |
रामदरश मिश्र |
|
८. |
ऐसा वसंत कब
आएगा ? |
गीत |
जगन्नाथ प्रसाद 'मिलिंद' |
व्याकरण एवं रचना विभाग तथा भावार्थ
१. सोंधी सुगंध
*
सूचना के अनुसार
कृतियाँ कीजिए:-
|
शब्द संसार
सोंधी – सुगंधित;
सागर – समुद्र; पुष्प - फूल मंसूबा – विचार,
इरादा; माथा – मस्तक रोली – हलदी-चुने का
चूर्ण; पावस – वर्षा ऋतु मधुमास – वसंत ऋतु;
आस – अशा विश्वास – यकीन,
निश्चित धारणा नतमस्तक – जिसका सिर
झुका हुआ हो पद – पैर ; हंसी ठिठोली
–हंसी मजाक
|
मेघों के बरसने से हुए परिवर्तन-
·
बादल बारसा,
धरती ने आंखे खोली।
·
चारो ओर हरियाली हुई।
·
बाग-बगीचा,
ताल तलैया मुस्काने लगे।
·
सागर का जो मनसुबा था अब
वह पुरा हो गया।
(२) कृति पूर्ण कीजिए:
सुगंध मिट्टी से बोली- * बादल
बरस गया, धरती ने आंखे खोली।
*
चारो ओर हरियाली छाई है।
*
सदियोंका जो सपना था वह पुरा हो गया।
*
मस्त पवन ने अब अपनी झोली खोली है।
*
मोर कहता है उसका सदियों का सपना पूरा हो गया।
(३)
गीत में प्रयुक्त क्रियारूप लिखिए।
१. बाग-बगीचे, ताल तलैया मुस्काते
है। == मुस्काना
२. झूम-झूमकर
मस्ती में तरु गीत-गाते हैं। ==गाना
३. मधुमास
आस-विश्वास – बढाता। ==बढाना
४. धरती ने श्रृंगार किया। ==करना
(४) उपसर्ग-प्रत्यय लगाकर शब्द लिखिए।
|
उपसर्ग |
शब्द |
प्रत्यय |
|
सुगंध |
गंध |
गंदगी |
|
असफल |
सफल |
सफलता |
अभिव्यक्ति
प्रस्तुत गीत की प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
चारो ओर हुई............. माटी से बोली
भावार्थ : जंगल मे रहनेवाले मोर काहते है की, बारीस
बरसने से चारो ओर हरियाली छाई हुई है। अब उसका सदियों का सपना पूरा हुआ है। अब वह
अकेला नही घुमता बल्की टोली मे रहते है।वर्षा ऋतु मे सोंधी –सोंधी सी सुगंध मिट्टी
से बात करती है।
भाषा
बिंदु
वर्तनी के अनुसार शुद्ध शब्द छाँटकर लिखिए।
१. विश्वास/विशवास/विसवास २. मसतक/मस्थक/मस्तक
३. पथ्थर/पथ्तर/पत्थर ४. कुरीति/कूरिति/कुरिती
५. चिन्ह/चीहन/चिहून ६. इकठठा/इकठ्टा/इकट्ठा
७. खुबसुरत/खूबसुरत/खूबसूरत ८. विद्यापीठ/विद्यापीठ/विद्यापिठ
९. बुद्धी/बुध्दी/बुद्धि १०. परिक्षार्थि/परीक्षार्थि/परीक्षार्थी
उपयोजित लेखन
निम्नलिखित सुवचन पर आधारित कहानी लिखिए:
उत्तर: ‘स्वास्थ्य ही संपदा है।’
श्रीरामपुर गाँव में धनसुखलाल नाम का एक धनी व्यक्ति रहता
था। वह बहुत ही कंजूस प्रवृत्ति का था। रईस होने के बावजूद भी वह स्वयं पर कभी भी
पैसे खर्च नहीं करता था। वह दिन में सिर्फ एक वक्त का भोजन करता था। इतना ही नहीं
वह अपने परिवार वालों पर भी धन खर्च नहीं करता था। उसकी कंजूसी के कारण उसका
परिवार प्रतिदिन भूखे पेट ही सोता था। एक दिन धनसुखलाल बीमार पड़ गया।
भरपेट खाना न खाने के कारण उसका शरीर
कमजोर हो गया था। उसकी शक्ति कम हो गई थी। परिवार के लोग उसे डॉक्टर के पास ले
जाना चाहते थे। लेकिन डॉक्टर के पास जाकर काफी रूपया खर्च हो जाएगा। इसलिए उसने
घरेलू औषधियों लेना प्रारंभ कर दिया। आहिस्ता-आहिस्ता उसका शरीर अत्यधिक अस्वस्थ
और कमजोर हो गया।
यहाँ तक कि अब उठकर चलने की शक्ति भी
उसमें शेष नहीं थी। फिर भी वह डॉक्टर के पास जाने के लिए राजी नहीं हुआ। उसी शाम
गाँव में एक महात्मा आए। उन्होंने धनसुखलाल के बारे में सुना और वे स्वयं उसे
मिलने गए। महात्मा को देखकर धनसुखलाल ने सोचा कि यह महात्मा उसका इलाज कर देंगे।
उसने आशा से महात्मा को प्रणाम किया। महात्मा ने उसे स्पष्ट कहा – ‘मूर्ख धनसुखलाल, मैं तुम्हारा भविष्य जानता हूँ। यदि तुम
अभी डॉक्टर के पास नहीं जाओगे; तो कल सुबह तक तुम्हारी मृत्यु निश्चित
है।’
महात्मा की भविष्यवाणी सुनकर धनसुखलाल के
हाथ-पाँव काँपने लगे और महात्मा को प्रणाम करके वह तुरंत अपने परिवार वालों के साथ
डॉक्टर के पास चला गया। डॉक्टर ने पूरी निष्ठा से उसका इलाज किया। कुछ दिनों के
बाद वह ठीक हो गया। अब उसकी समझ में आ गया था कि ‘स्वास्थ्य ही संपदा होती है।’
सीख : स्वास्थ्य से बढ़कर दूसरी कोई
संपत्ति नहीं होती। व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का सदैव ध्यान रखना चाहिए।
‘सदियों का जो सपना है हो जाए पूरा।’ इससे आप समझते हैं।
उत्तर: भीषण गरमी के कारण धरती बंजर हो गई थी।
अब बारिश के आने से वह फिर से हरी-भरी हो जाएगी।
कृति अ (१) : शब्द संपदा
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ पद्यांश में से
ढूँढ़कर लिखिए।
मेघ = बादल मोर = मयूरा मृदा = माटी ख्वाब = सपना
विलोम शब्द लिखिए।
- सुगंध x दुर्गंध
- पूरा x अधूरा
वचन बदलिए।
- सदी – सदियाँ
- हरियाली - हरियालियाँ
- टोली - टोलियाँ
- आँखें – आँख
- बोली – बोलियाँ
- रोली – रोलियाँ
- झोली - झोलियाँ
- बगीचा - बगीचे
निम्नलिखित तत्सम शब्द का तद्भव रूप लिखिए।
- मयूर – मोर
- हरित – हरा
निम्नलिखित शब्द का देशज व तत्सम शब्द लिखिए।
1. मिट्टी
उत्तर : देशज शब्द :
माटी, तत्सम शब्द: मृदा
कृति अ (२) : स्वमत अभिव्यक्ति
आपने पहली बारिश के बाद चारों और महकने वाली मिट्टी की
सुगंध को जरूर महसूस किया होगा। उस वक्त जो अनुभूति हुई थी, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
बारिश के पहले भीषण गरमी के कारण मिट्टी तपती है। जैसे ही
वर्षा की पहली बूंदें धरती पर आती हैं, वैसे ही तपती हुई मिट्टी शीतलता का अनुभव
करने लगती है। फिर उसमें से जो गंध उठती है, उसका क्या कहना? मिट्टी की सोंधी सुगंध सभी को आकर्षित करती है। मैं पिछले वर्ष बरसात शुरू
होने से पहले अपने गाँव गया था। वहाँ पर मैंने पहली बरसात का अनुभव किया था। बारिश
रुकते ही अचानक से सारा वातावरण मिट्टी की भीनी-भीनी सोंधी खुशबू से प्रफुल्लित हो
उठा। मानो वह सोंधी महक मुझे बता रही थी कि हम सब उससे जुड़े हैं। हमारा शरीर भी
उसी से बना है। आखिर मिट्टी हमें जीवन देती है। सचमुच मिट्टी की उस सोंधी महक ने
मेरे चित्त को प्रसन्न कर दिया था। आज भी वह महक मेरे रोम-रोम में समाई हुई है। उस
सोंधी महक को महसूस हुए मुझे मनुष्य और मिट्टी के बीच जो गहरा रिश्ता है इसका
एहसास भी हुआ था।
कृति आ (१) : शब्द संपदा
‘रोली’ शब्द का अनेकार्थी शब्द लिखिए।
उत्तर: सिंदूर, प्रसिद्ध भूमि, हल्दी व चूने का चूर्ण
निम्नलिखित तद्भव शब्द का तत्सम रूप लिखिए।
माथा – मस्तक पद - पाँव या पैर मास
– महिना पेड़ – तरु
हँसी - हास्य
कृति आ (२) : स्वमत अभिव्यक्ति
‘बारिश के बाद प्रकृति में होने वाला
परिवर्तन’ विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
वर्षा ऋतु समस्त ऋतुओं की रानी है। बारिश होते ही चारों ओर
हरियाली छा जाती है। वर्षा होने से तालाबों और नहरों में पानी भर जाता है। सागर
अपनी मस्ती में लहरों के साथ नर्तन करता रहता है। वर्षा से सूखे पेड़-पौधों में भी
जीवन आ जाता है। संपूर्ण वातावरण
खुशनुमा हो जाता है। मिट्टी से सोंधी महक आनी शुरू हो जाती
है। यह महक हमारे चित्त को प्रसन्न कर देती है। बारिश के बाद कृषकों में उल्लास
बढ़ जाता है और वे अपने खेतों में लगन
के साथ जुट जाते हैं। मोर प्रसन्न होकर नाचने लगते हैं और
मेंढक टर्र-टर्र की आवाज करते रहते हैं। इस प्रकार बारिश के बाद प्रकृति की शोभा
देखने लायक होती है।
निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के
अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति इ (१): आकलन कृति
प्र. 1. सदा-सदा से यह चली आई है –
उत्तर : हँसी-ठिठोली
प्र. 2. यह नतमस्तक हो गए हैं –
उत्तर : कवि ‘अचूक’
निम्नलिखित शब्द पढ़कर ऐसे दो प्रश्न तैयार
कीजिए कि जिनके उत्तर निम्न शब्द हों
प्र. 1. माटी
उत्तर: सोंधी-सौंधी-सी
सुगंध किससे बात कर रही है?
प्र. 2. मधुमास
उत्तर: कवि ने पावस को
किसकी उपमा दी है।
कृति इ (२) : शब्द संपदा
पद्यांश में से शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर: आस-विश्वास, सदा-सदा,
हँसी-ठिठोली, सोंधी-सौंधी-सी
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए।
- मधुमास - वसंत ऋतु
- पुष्प - फूल
- आस – आशा
- नत – विनीत
कृति इ (३) : स्वमत अभिव्यक्ति
‘मनुष्य जीवन में वर्षा का महत्त्व’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
हमारा भारत देश कृषिप्रधान देश है। यदि बारिश समय पर न होगी, तो सूखा या दुर्भिक्ष (अकाल) की स्थिति निर्माण होने में देर नहीं लगेगी। वर्ष
के बारह महीने में से तीन या चार महीनों तक लगातार बारिश होने के कारण प्रकृति का
संतुलन बना रहता है। जल के बिना मनुष्य जीवन संभव नहीं। इसलिए हमारे जीवन में
वर्षा का अत्यधिक महत्त्व है। वर्षा का मौसम तपती गरमी से राहत दिलाता है। बारिश
की बूंदें धरती के बढ़े हुए तापमान को अपने अंदर समा लेती हैं। वर्षाकाल में लोग
वर्षा का आनंद लेने के लिए पिकनिक मनाते हैं। वर्षा में सूखे हए तालाब, कुएँ और नदियाँ फिर से भर जाती हैं। इस कारण पूरे वर्ष तक मनुष्य को पीने के
लिए पानी उपलब्ध होता है।
२ . खोया
हुआ आदमी
शब्द
संसार
बेतहाशा = बड़ी तेजी से,
बहुत घबराकर और बिना सोचे-समझे
वज्रपात = सहसा होने वाला बहुत बड़ा अनिष्ट, आघात
गरिमा = गौरव; लोप = नाश, क्षय; फैसला = निर्णय, निपटारा
ज्यादतियाँ = अन्याय, परेशान करने की वृत्ति; बरकत = समृद्धि, संपन्नता
मुहावरे
आगाह कर देना = सचेत करना
खाली हाथ लौटना = कुछ भी न पाना
जमीन का निगल जाना/ लापता हो जाना = आसमान का खा जाना
सूचना
के अनुसार कृतियाँ कीजिए:-
(२) उत्तर लिखिए :
(३) ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए
जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों :
भविष्यवाणी
उत्तर: गाँव वालों को
मुसीबत से बचाने के लिए खोया हुआ आदमी क्या बताता था?
झमाझम बारिश
उत्तर: बच्चे-बड़े सभी
किसमें भीगने का भरपूर आनंद लेने लगे?
खुशहाली
उत्तर: खोए हुए आदमी की
मदद गाँव वालों के लिए क्या लेकर आई?
गंधक
उत्तर: जिस रात मौसम
बौराया उस रात किसकी तेज गंध पूरे गाँव में फैल गई?
(४) दिए गए निर्देश के अनुसार परिवर्तन
कीजिए
अभिव्यक्ति
‘मानवता ही सच्चा धर्म है।’ पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
मानवता शब्द का
सरल शब्दों में मतलब है – मनुष्यता मानवता
मनुष्य का धर्म
होता है। आज मानवीय मूल्यों का पतन हो रहा है। इंसान स्वार्थ की पट्टी के कारण
अंधा होता जा रहा है। इंसान को स्वार्थ, लोभ, मोह आदि से परहेज करना चाहिए। प्रत्येक
मनुष्य की सहायता करनी चाहिए। मानवता के बदले हम सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। मानवता से भरा जीवन जीने से व्यक्ति के
अंदर सहज रूप से शक्ति और स्फूर्ति आ जाती है।
एक-दूसरे की मदद करने से हम एक-दूसरे की पीड़ा, व्यथा, वेदना को दूर कर सकते हैं। इससे बढ़कर
कोई अन्य धर्म नहीं हो सकता। जीवन में जो महापुरूष हुए हैं, उन्होंने अपने जीवन में मानवता के धर्म को ही अपनाया था। महाकवि गुप्त जी ने
ठीक ही लिखा है – ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।’ मानवता का धर्म मानव जाति को एक-दूसरे से प्रेम करना सिखाता है।
भाषा बिंदु
(१) निम्नलिखित वाक्यों में आए
हुए अव्ययों को रेखांकित करते हुए उनके भेद लिखिए :
उसके जहन से उसका नाम और पता पूरी तरह खो चुके थे। —–
उत्तर: परंतु
ओह ! दिव्या मैं ठीक हूँ। —–
उत्तर: अरेरे!
उसकी भविष्यवाणी के कारण गाँववाले मुसीबतों से बच जाते । —-
उत्तर: के समान
वहाँ से तुलसीनगर पास पड़ता है । —–
उत्तर: धीरे-धीरे
काश, अपने गाँव-शहर में हमें भी ‘खोया हुआ आदमी’ मिल जाता ! —–
उत्तर: इसलिए
कभी-कभी मेरा मन उच्चाकाश में उड़ने वाले पक्षियों के साथ
अनंत के ओर-छोर नापना चाहता है। —————
उत्तर: छि !
ब्लडप्रेशर भी ज्यादा है पर चिंता की कोई बात नहीं । ——–
उत्तर: ऊपर
इतनी जल्दी लौट जाते हैं । —–
उत्तर: के अलावा
(२) निम्नलिखित अव्ययों का सार्थक वाक्य
में प्रयोग कीजिए।
परंतु :
उत्तर: मैं तुम्हें
मिलने आने ही वाला था परंतु कुछ कारण वश नहीं आ सका।
अरेरे! :
उत्तर: अरेरे! यह क्या
हो गया?
के सामान :
उत्तर: उसके समान कोई
भी बहादुर नहीं है।
धारे-धीरे :
उत्तर: गाड़ी धीरे-धीरे
जा रही थी।
इसलिए :
उत्तर: वह बीमार है
इसलिए आज स्कूल नहीं गया।
छि! :
उत्तर: छि! कितनी गंदगी
है।
ऊपर :
उत्तर: उसके ऊपर एक
किताब है।
के अलावा :
उत्तर: मुझे इसके अलावा
और कुछ नहीं अच्छा लगता।
उपयोजित लेखन
‘विश्व बंधुता : वर्तमान युग की माँग’ इस विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
उत्तर:
संस्कृत में एक
सुभाषित है – सर्वे भवन्तु सुखिन। सर्वे सन्तु निरामयाः । इसका अर्थ यह है कि संसार में सब सुखी रहें, सब निरोग रहें और विश्व में कोई दुखी न हो। इसे ही विश्व बंधुत्व कहते है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ ऐसा जो कहा गया है, वह शत-प्रतिशत उचित है। जब तक व्यक्ति विश्व बंधुत्व को नहीं अपनाएगा; तब तक मानवता अधूरी रहेगी, मानव अधूरा रहेगा, राष्ट्र अधूरा रहेगा और विश्व भी अधूरा ही रहेगा। आज हमारे देश में ही नहीं
बल्कि विश्व के कई देशों में अशांति, अराजकता,
हिंसा आदि
प्रवृत्तियाँ दिखाई दे रही हैं। इनके कारण व्यक्ति,
समाज और राष्ट्र
की हानि हो रही है।
आज हमारे समाज में ईर्ष्या,
द्वेष, नफरत की भावनाएँ बढ़ रही हैं। इस कारण समाज में दुश्मनी का भाव पनपने लगा है।
ये दशा राष्ट्र की भी है। एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र की सीमा पर आए दिन हमला कर रहा
है। इस कारण अशांति निर्माण हो रही है। इसी कारण ‘विश्व-बंधुत्व’ वर्तमान युग की माँग है। विश्व बंधुत्व की भावना मानव अधिकारों की सुरक्षा की
कुंजी है। विश्व-बंधुत्व की भावना को अपनाने से सभ्य मानवी समाज विकसित होगा।
गरीबी, जाति, धर्म, ऊंच-नीच आदि समस्याओं का समाज से निर्मूलन
होगा। विश्व-बंधुत्व की भावना को अपनाने से विश्व में अहिंसा का प्रचार होगा।
विश्व में शांति निर्माण होगी। युद्ध व हिंसा खत्म हो जाएगी। सर्वत्र समानता दिखाई
देगी। सर्वत्र भाईचारा निर्माण होगा। मानवीय मूल्यों का संवर्धन होगा। आखिर, प्रत्येक मानव को श्रेष्ठ समाज के निर्माण के लिए विश्व बंधुत्व की भावना को
आत्मसात करना ही होगा।
लेखनीय
प्रतिभा जन्मजात होती है;
परंतु उसके
पल्लवन हेतु उचित वातावरण की आवश्यकता होती है।
उत्तर:
प्रतिभा ईश्वर
से मिलती है। प्रत्येक मानव के पास प्रतिभा होती है। फर्क सिर्फ इतना ही होता है
कि वह किसी व्यक्ति में अत्यधिक रूप से विकसित होती है, तो किसी व्यक्ति में वह विकसित नहीं होती। प्रतिभा का पल्लवन एक उचित वातावरण
में ही होता है। उदाहरण के तौर पर देखिए – बचपन में इंदिरा गांधी को रवींद्रनाथ
टैगोर व महात्मा गांधी का साथ मिला। उनके साथ वह पली-बढ़ीं। उनके विचार एवं
सिद्धांतों से प्रभावित हुई। तब जाकर उनकी प्रतिभा रग लाई। प्रतिभा वृद्धि की कोई
सीमा नहीं होती।
टाटा और अंबानी जैसे व्यक्ति उद्योगपतियों के रूप में सफल
हुए हैं, तो सचिन तेंदुलकर व पी. टी. ऊषा जैसे
खिलाड़ी क्रीडा क्षेत्र में सफल हुए हैं। ये सब अद्भुत प्रतिभा के ही उदाहरण हैं।
व्यक्ति को अपने भीतर की प्रतिभा को पहचानकर मनचाहे क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।
किसी ने ठीक ही कहा है – ‘जीवन का आनंद स्वयं को जानने में है।’ अत: हर व्यक्ति को स्वयं का निरीक्षण करके अपनी प्रतिभा का पता लगाना चाहिए और
उसके विकास के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। व्यक्ति को स्वयं की प्रतिभा के
पल्लवन हेतु स्वयं ही अग्रसर होकर उचित माहौल या परिस्थिति निर्माण करनी जाहिए।
आखिर जहाँ चाह होती है, वहाँ राह भी होती है।
निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के
अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति अ (१): आकलन कृति
कृति पूर्ण कीजिए।
समझकर लिखिए।
किसने, किससे
कहा?
1. “शायद मैं खो गया हूँ।”
उत्तर: गाँव में आए एक
आदमी ने गाँव के एक भले आदमी से कहा।
सही विकल्प चुनकर लिखिए।
1. गाँव में आया हुआ आदमी कुत्तों को पागल लगा क्योंकि ……….
(क) वह चीथड़ों
में लिपटा था।
(ख) उसका शरीर
रेशमी कपड़ों में लिपटा था।
(ग) उसका शरीर
कंबल में लिपटा था।
उत्तर:
गाँव में आया
हुआ आदमी कुत्तों को पागल लगा क्योंकि वह चीथड़ों में
लिपटा था।
कृति अ (२) : शब्द संपदा
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ गद्यांश में से ढूँढ़कर लिखिए।
- प्रतिष्ठा
- निशान
- बड़ी तेजी
से
- देहात
उत्तर:
- गरिमा
- चिह्न
- बेतहाशा
- गाँव
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए।
1. अचानक आ जाने वाला
उत्तर: आंगतुक
निम्नलिखित शब्द के अनेकार्थी शब्द लिखिए।
1. बेतहाशा
उत्तर: अचानक, वेगपूर्वक, बिना सोचे-समझे
2. ‘ग्राम’
तत्सम शब्द का
तद्भव रूप लिखिए।
उत्तर: गाँव
दिए गए निर्देश के अनुसार परिवर्तन कीजिए।
कृति अ (३) : स्वमत अभिव्यक्ति
1. ‘खोया हुआ आदमी’ इस संकल्पना से आप क्या समझते हैं? अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
‘खोया हुआ आदमी’ वह है जिसके चेहरे पर खोने के भाव मौजूद होते हैं। जिस व्यक्ति को अपनी जाति
एवं धर्म के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं होता है,
वह खोए हुए आदमी
की श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं, जो व्यक्ति अपने घर, परिवार एवं रिश्तेदारों को भूल गया हो और अकेले यत्र-तत्र घुमक्कड़ की भाँति
भटकता-फिरता हो, वह खोया हुआ आदमी होता है। जीवनकाल में
व्यक्ति के हृदय पर भारी आघात हो जाने पर या गहरा सदमा पहुँचने पर व्यक्ति की दशा
खोए हुए आदमी के जैसी हो जाती है। जीवन की आपाधापी में जिन लोगों के मन में भावों
का ऊहापोह मचना शुरू हो जाता है, ऐसे लोग मेरे मतानुसार खोए हुए आदमी की
श्रेणी में आते हैं।
प्रश्न २ (आ) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के
अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति आ (१): आकलन कृति
संजाल पूर्ण कीजिए।
0 ಕಾಮೆಂಟ್ಗಳು
ಧನ್ಯವಾದಗಳು