हिन्दी सुगमभारती आठवी कक्षा स्वाध्यायमाला
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लेखन और संकलन
श्री. दिनेश ठाकूरदास चव्हाण
जि.प.प्राथमिक कन्नड पाठशाला, बबलाद
ता. अक्कलकोट जि.सोलापूर
मो.नं. 7066102066
अनुक्रमणिका
पहली इकाई
|
क्र. |
पाठ का नाम |
विधा |
रचनाकार |
|
१. |
हृदय
का उजाला |
गीत |
रमाकांत
यादव |
|
२. |
उसी
से ठंडा, उसी से गरम |
हास्य
कथा |
डॉ.
जाकिर हुसैन |
|
३. |
गाना-बजाना |
विवरणात्मक
निबंध |
रामवृक्ष
बेनीपुरी |
|
४. |
श्रद्धा
और प्रयास |
पत्र |
काका
कालेलकर |
|
५. |
सुनो
और गुनो |
आधुनिक
दोहे |
गोपालदास
सक्सेना 'नीरज' |
|
६. |
और
प्रेमचंद जी चले गए |
संस्मरण |
डॉ.
रामकुमार वर्मा |
|
७. |
हींगवाला |
संवादात्मक
कहानी |
सुभद्राकुमारी
चौहान |
|
८. |
कदम
मिलाकर चलना होगा |
नवगीत |
अटलबिहारी
वाजपेयी |
|
| |||
दूसरी इकाई
|
१. |
पंपासर |
खंडकाव्य
का अंश |
नरेश
मेहता |
|
२. |
परोपकार |
लघुकथा |
श्रीकृष्ण |
|
३. |
आत्मनिर्भरता |
वैचारिक
निबंध |
आचार्य रामचंद्र शुक्ल |
|
४. |
तुम
मुझे खून दो |
भाषण |
नेताजी सुभाषचंद्र बोस |
|
५. |
संतवाणी |
पद महाकाव्य
का अंश |
संत
मीराबाई गोस्वामी
तुलसीदास |
|
६. |
प्राकृतिक
सौंदर्य से पूर्ण 'अल्मोडा' |
यात्रा
वर्णन |
डॉ.
इसरार 'गुनेश' |
|
७. |
सम्मेलन
अंगों का |
एकांकी |
श्रीप्रसाद |
|
८. |
जिंदगी
का सफर |
गजल |
नंदलाल
पाठक |
व्याकरण
तथा रचना विभाग एवं भावार्थ
१. हृदय का उजाला
शब्द वाटिका
गम = दुख, चाहत = अभिलाषा, इच्छा
अनगिन = जो गिना नहीं जाता, असंख्य
स्नेहक = स्नेह का मरहम या लेप
* सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-
(१) रिक्त स्थानों में उचित शब्द
लिखो :
१. मिटाना है अंधेरे
को ।
२. उजाला लाना है हृदय
में।
३. भोजन कराना है भुके
को ।
४. ज्योति जलानी है दिल में।
(२) कविता में आए दीवाली से संबंधित
दो शब्द लिखो:
१.
फुलझाडिया २. पटाखे
(३) वाक्य के सामने सही अथवा गलत
लिखो:
१. कवि ने हमें अपने दिलों के दीप जलाने के लिए कहा
है। = सही
२. कवि ने दीन-दुखियों को दुख देने के लिए कहा है। = गलत
भाषा बिंदु
समानार्थी शब्द लिखो :
दीपक = दिया , दीप हृदय = दिल , मन
आनंद = खुशी, हर्ष घाव = चोट, दर्द, लाचार = बेबस, मजबूर
*'दीन-दुखियों का दुख दूर करना
चाहिए' विषय पर अपने विचार संक्षेप में लिखो ।
२. उसी से ठंडा, उसी से गरम
शब्द वाटिका
ठिठुरना = थंड से कंपन बालिश्तिया = सिरे तक की लंबाई, बित्ता
सुन्न = संवेदनारहित ताज्जुब = आश्चर्य
सहम जाना = घबरा जाना रंज = दुख
बालिश्त = अंगुठे के सिरे से लेकर कनीष्ठिका के
सिरे तक की लंबाई, बित्ता
* सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-
(१) संजाल पूर्ण करो : बालिश्तियों की विशेषताएँ
- छोटे छोटे बालिस्त भर के आदमी होते है।
- उनके लडके किसी परदेशी को सताते नही।
- न तालिया बजाते।
- न पत्थर फेकते।
(२) उत्तर लिखो :
पाठ में प्रयुक्त सरदी से संबंधित शब्द:
हात ठिठुरे जाते है, फुंकना, गरमा लेना, जाडा, ठंडा
(३) निम्नलिखित कथनों में से असत्य
कथन को सुधारकर फिर से लिखो :
१. बालिश्तिये को खाना बनाने की फिक्र हुई।
उत्तर: असत्य कथन। सत्य यह है की लकडहारा को खाना बनाने
की फिक्र हुई।
२. सरदी के कारण लकड़हारे के हाथ ठिठुरे जाते हैं।
उत्तर: सत्य।
३. लकड़हारा एक भलामानस था।
उत्तर: सत्य
४. बालिश्तिये
के पास एक छोटी हाँड़ी थी।
उत्तर: असत्य, लकडहारे के पास
एक छोटी हाँड़ी थी।
भाषा बिंदु
(अ) दिए गए शब्दों का वचन परिवर्तन
करके अपने वाक्यों में प्रयोग करो :
|
शब्द |
वचन
परिवर्तन |
वाक्य |
|
दीवार |
दिवारे |
मकान दिवारो से बनता है। |
|
महिला |
महिलाये |
गाव की महिलाये बाजार जा रही है। |
|
लकड़हारे |
लकडहारा |
लकडहारा पेड काट रहा है। |
|
ऊँगलियाँ |
ऊँगली |
ऊँगलीमाल डाकु लोगों की ऊँगली काटता
था। |
|
हाथ |
हाथ |
मेरे हाथों मे नव नव चुडिया है। |
(आ) पाठों में प्रयुक्त सहायक क्रिया के वाक्य ढूँढ़कर लिखो ।
सहायक क्रिया - था, है, गया, थी, थे, हूं, हुई,
उपयोजित लेखन
वृक्ष और पंछी के बीच का संवाद लिखो।
वृक्ष: नमस्कार, पंछी! आप
कैसे हो?
पंछी: नमस्कार, वृक्ष। मैं ठीक हूँ, धन्यवाद। आपकी पत्तियों में अब नए रंग आने लगे हैं, बहुत सुंदर
दिख रहे हो।
वृक्ष: धन्यवाद, पंछी। आपका ध्यान कभी-कभी मेरे ऊपर से हटता है और आपको
उड़ते देखना मुझे खुशी देता है। आपको खुली आसमान में उड़ते देखकर मुझे भी अच्छा
लगता है।
पंछी: वाकई? आपको मेरी उड़ान देखकर खुशी होती है? आपने कभी
सोचा है,
वृक्ष,
कि आपकी ऊँचाईयों से ऊपर उड़ते हुए हम पंछियों को कितनी आज़ादी मिलती है?
वृक्ष: हां, पंछी, मैंने कभी इस बारे में विचार किया है। आप पंछियों को वाकई
आज़ादी का अनुभव करते होंगे। आप जहां चाहें उड़ सकते हैं, खुली आसमान
में घूम सकते हैं, और नदी-तालाबों के किनारे घर बना सकते हैं।
पंछी: हां, वृक्ष, यह सब करने में बड़ा मजा आता है। आपके नीचे रहकर भी मैं
आपसे जुड़ा हुआ महसूस करती हूँ। आपकी छाया और फूलों की सुगंध हमें खुश रखती है।
वृक्ष: धन्यवाद, पंछी। आपकी संगीतमय चहचहाहट भी मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
आप पंछियों की मधुर स्वरों से प्रकृति को और सुंदर बना देते हो।
पंछी: आपकी प्रशंसा के लिए धन्यवाद, वृक्ष। हम एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। हमारे बीच का यह
संवाद हमारी दोस्ती को और मज़बूत बनाता है।
वृक्ष: सही कहा, पंछी। हमारी दोस्ती कभी न तूटे। हम एक-दूसरे के साथ सभी
खुशियाँ और दुखों को साझा करते हैं।
पंछी: आपसे मिलकर बात करना मुझे बहुत अच्छा लगता है, वृक्ष।
आपकी स्थिरता और सदाचार का मुझ पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। आप हमें एक साथ रहने का
बहुत समय देते हो, इसके लिए धन्यवाद।
वृक्ष: धन्यवाद, पंछी। हम सभी प्राकृतिक तत्व एक-दूसरे के संबंध को समझते
हैं और साथ मिलकर एक सुंदर विश्व बनाते हैं।
पंछी: चलिए, वृक्ष, मैं अब ऊपर की सैर करके आती हू।
३. गाना
– बजाना
शब्द वाटिका
बेतहाशा = असीमित मशहूर = प्रसिद्ध
पिपुही= छोटी बाँसुरी, पिपहरी मुँगरी
= मुठियादार लाठी
नरकट = पतली गाँठदार बेंत बेशी = ज्यादा
ईजाद = खोज अधिवासी = आकर
बसने वाला
* सूचना के अनुसार कृतियाँ करो:-
(१) संजाल पूर्ण करो :
पाठ में आए हुए बाजों के नाम
पिपुही, ढोल, झुनझुना, वीणा, राजा, बांस, ऐंगलौंग, सितार, सारंगी, बाजो की खिचडी, मरिंबा
इत्यादि।
(२) पाठ के आधार पर जानकारी लिखो :
१. मरिंबा: यह मेक्सिको देश
का बाजा का नाम है। उसपर एकसाथ ही चार चार आदमी बाजा बजा लेते है।
२. राजा: चीन के बाजे का नाम ‘राजा’ है । एक काठ का तख्ता लटका है, जिसपर सोलह
पत्थर के टुकडे दो पंक्तीयो
में सजाए रहते
है। जिनपर एक काठी की मुँगरी से हलके-हलके मारकर नाना तरह के स्वर
निकालते है ।
(३) लिखो:
बाजा, गाने को बना देता
है = बाजा उस गाने को भडकदार
और
दिलचस्प बना देता है।
जापान के तारवाले बाजे = जापान में, भारत के ही समान, तार के संयोग से
बने बाजों की भी बडी कदर है । सितार, सारंगी,
वीणा ऐसे बहुत से
तारवाले बाजे वहा है। ।
भाषा बिंदु
(अ) शब्द बनाओ:
उपसर्ग प्रत्यय
आसमान युक्त समान
युक्त समानता
शब्द शब्द
असुर युक्त शब्द
सुर युक्त शब्द सुरेली
आप: आप मुझे अच्छे लगते है।
हम: हम पढ लिखकर पढे आदमी बनेंगे।
उनमे: खो खो खेलते वक्त ऊनमे एकता होनी चाहीए।
वहाँ: वहाँ के गवैयों पर एक आफत भी है।
उनके : उनके पास केवल तीन ही बाजे हो ते हैं-ढोल, पि पुही और झुनझुना।
उपयोजित लेखन
अनुवाद करो :
अपनी मातृभाषा के समाचार पत्र की दस पंक्तियों का
हिंदी में अनुवाद करो ।
४. श्रद्धा और प्रयास
-काका
कालेलकर
शब्द वाटिका
लुत्फ = आनंद, अभ्युपगम = अंगीकार, पास
जाना, समन्वय =
ताल-मेल
मुहावरा
बेड़ा पार होना = उद्धार होना
*सूचना के अनुसार कृतियाँ करो:-
(१) कृति पूर्ण करो :
|
(२) एक वाक्य में उत्तर लिखो : |
१. किस रास्ते को तुरंत छोड़ देना चाहिए?
उत्तर: बुद्धी ने जिस
रास्ते को
हिन, गलत और त्याज्य बताया,
उस रास्ते को
तुरंत
तुरंत छोड देना चाहिए ।
२. बापूजी को अपनी जीवननिष्ठा से क्या प्राप्त हुआ?
उत्तर: बापुजी अपने सत्यनिष्ठा, आत्मानिष्ठा और अनुभवमूलक जीवननिष्ठा से अपने जीवन को सफल बनाया।
(३) लिखो:
१. जीवन का व्याकरण = सामंजस्य और समन्वय ही जीवन का
सच्चा व्याकरण है।
२. ज्ञान प्राप्ति के लिए
आवश्यक = श्रद्धा के बिना ज्ञान
प्राप्त नही होगा। और केवल श्रद्धा से भी नही
होगा। ज्ञान
प्राप्ती के लिए चाहिए प्रयत्न, प्रयोग और कसौटी करने की तत्परता ।
(४) लेखक द्वारा बताई मुख्य बातें :
1.
बुद्धी ने जिस
रास्ते को
हिन, गलत और त्याज्य बताया,
उस रास्ते को
तुरंत
तुरंत छोड देना चाहिए ।
2. श्रद्धा के बिना ज्ञान प्राप्त नही होगा।
3. श्रद्धा, बुद्धी, समझ, अनुभव, कल्पना, अभ्युपगम आदि सब बाते अपनी –अपनी जीवनदृष्टि को प्रधानता देती है।
(अ) निम्न शब्दों का वर्ण विच्छेद करो :
भाषा बिंदु
जैसे- विधा = व्+इ+ध्+आ
विकास = व्+इ+क्+आ+स्+अ
कारण = क्+आ+र्+अ+ण्+अ
कमजोरी: =क्+अ+म्+अ+ज्+ओ+र्+ई
कैसे = क्+अ+ए+स+ए
कौआ =क्+अ+ऊ+आ
जुगनू =ज्+उ+ग्+अ+न्+उ
(आ) पाठ में आई दस क्रियाओं के प्रथम
तथा दूद्वितीय प्ररेणार्थक रूप लिखो ।
प्रथम प्ररेणार्थक रूप दूद्वितीय प्ररेणार्थक रूप
मिलना मिलाना
देखा देखना
बनना बनाना
रखना रखाना
बता बताना
करना करवाना
बैठना बिठाना
समझ समझना
डरना डराना
उपयोजित लेखन
'सब दिन होत न एक समान का अनुभव कराने वाला कोई
प्रसंग लिखो।
५. सुनो और गुनो
-गोपालदास
सक्सेना ‘नीरज’
शब्द वाटिका
मँझधार = नदी की धारा के बीच प्रभात = सुबह
पतवार = नाव को आगे-पीछे चलाने का साधन, चप्पू. शीश = सिर
खद्योत = जुगनू छाँह
= छाया
*सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-
(१) परिणाम लिखो :
१. दूरदर्शन के आने का – अपनी संस्कृति बिना तीर-तलवार से
ही सब घायल हो गई है।
२. दूरभाष के प्रचार का-
दूरभाषा के प्रचार तब से होने लगा है, तब से अपनो की
चिट्टी-पत्र या तार भी आना बंद हो गया।
(२) प्रस्तुत कविता में से अपनी पसंद
के किन्हीं दो दोहों से मिलने वाली सीख लिखो ।
उत्तर: दूरभाष का देश मे जब से हुआ प्रचार
तब से घर आते नही चिट्टी-पत्री-तार।
शीख: विदेशी भाषा की प्रचार जब से सुरू हुआ, तब से अपने लोग अपनो से बिछुडने लगे है। घर परिवार,
मित्र परिवार मे होनेवाले पत्र व्यवहार बंद हो गया है। आजकाल घर मे किसी की भी
चिट्टी –पत्र या तार आना बंद हो गया है।
ज्ञानी
हो फिर भी न कर दुर्जन संग निवास,
सर्प-
सर्प है, भले ही मणी हो उसके पास।
शीख: ज्ञानी, पंडित और अच्छे
लोग दुर्जन के संग नही जाना चाहीये। ऊनके पास निवास नही करना चाहीये। भले ही नाग
सर्प के पास मणी हो मगर ओ काटेगा जरूर। ऐसेही दुर्जन लोग अपना रंग दिखा देते है।
(३) उचित जोड़ियाँ मिलाओ
अ उत्तर आ
१. सर्प मणी छाँह
२. घनश्याम सूरदास मणी
३. फूल खुशबू सूरदास
४. वृक्ष छाँह खुशबू
(४) फूल तब भी सुगंध देते हैं
तोडो, मसलो या उसपर धूल
डालो
'चरित्र निर्माण में सत्संगति आवश्यक
होती है' इसपर अपने विचार लिखो।
उत्तर:
भाषा बिंदु
निम्नलिखित विरामचि ह्नों का प्रयोग करके कोई संवाद
लिखो :
प्रश्नार्थक चिह्न ? उद्गारवाचक चिह्न ! : अल्पविराम , पूर्णविराम । ‘......’ “........”
उपयोजित लेखन
अपने विद्यालय में मनाए गए 'बाल दिवस' समारोह का वृत्तांत
लिखो।
६. और प्रेमचंद चले गये
शब्द वाटिका
तकल्लूफ =औपचारिकता, औपचारिकता
अट्टहास = जोर की हँसी,
ठहाका
प्रतीक्षा = इंतजार
निहायत = बहुत
|
प्रेमचंद
जी की विशेषताएँ |
|
वृध्द सज्जन |
|
सरल और सौम्य |
|
आकाशव्यापी अट्टहास |
|
प्रासिद्ध कहानी और उपन्यास लेखक |
(२) कारण लिखो :
१. प्रेमचंद जी प्रयाग आए थे
.........
कारण: प्रेमचंदजी हिंदुस्तानी एकेडेमी के वार्षिक
अधिवेशन में भाग लेने के लिए प्रयाग आए थे।
२. लेखक कविताओं की प्रेस कॉपी बना
रहे थे...........
कारण: लेखक अपनी कविताओं की संग्रह प्रकाशित करने के
हेतु अपनी कविताओं की प्रेस कॉपी बना रहे थे
३. प्रेमचंद जी ने लेखक की पत्नी
द्वारा परोसी खीर खाई थी......
कारण: लेखक की पत्नी ने प्रेमचंद
जी के लिए खाना परोसकर ऊनके कमरे मे रखा थी। रात दो बजे वे आने तक खीर का दूध फट गया
था। इस फटा दूध का खीर न खाने से मेरी ओर से बहुरानी का दिल न फट जाये। इसलिए प्रेमचंद
जी ने लेखक की पत्नी द्वारा परोसी खीर खाई थी।
(३) एक वाक्य में उत्तर लिखो
१. सुबह उठकर लेखक ने क्या देखा?
उत्तर: सुबह उठकर लेखक ने देखा की प्रेमचंद जी अपना
सामान लेकर चले गए है।
२. लेखक का काव्य संग्रह किस नाम से प्रकाशित हुआ?
उत्तर: रूपराशि के नाम से लेखक का काव्य संग्रह प्रेमचंद
जी के सरस्वती प्रेस बनारस से प्रकाशित हुआ।
भाषा बिंदु
पाठ के किन्हीं दस वाक्यों के
उद्देश्य और विधेय अलग करके लिखो ।
उपयोजित लेखन
मुद्दों के आधार पर कहानी लिखो :
एक जंगल में विशाल घना वृक्ष....... उसपर पक्षियों
के घोंसले ....... विषैले बाण, पेड़ के तने में घुसने से
पेड़ का सूख जाना ....... सारे पक्षियों का इधर-उधर उड़ जाना ....... एक तोते का
उसी पेड़ पर बैठे रहना ...... दूसरे तोते का उड़ चलने
का आग्रह करना ...... इनकार ....... कहना 'मेरी दो पीढ़ियों का इसी पेड़ पर निवास ..... "इसे
छोड़कर जाना असंभव' .... शीर्षक
कहानी
कहानी: जड़ों से जुड़ा तोता
एक घने जंगल में एक विशाल वृक्ष था। वह वृक्ष अनेक जीवों का आश्रय था। उसकी
डालियों पर असंख्य पक्षियों के घोंसले बने थे। सुबह-सुबह चहचहाहट से पूरा जंगल
गूँज उठता। वृक्ष मानो पक्षियों का महल ही था।
एक दिन अचानक किसी शिकारी ने विषैले बाण उस वृक्ष की ओर छोड़े। बाण सीधे तने में जाकर धँस गए। धीरे-धीरे ज़हर पूरे तने में फैलने लगा और वृक्ष सूखने लगा। उसकी हरी पत्तियाँ पीली पड़ गईं। डालियाँ टूटने लगीं। खतरा महसूस होते ही पक्षी अपने-अपने घोंसले छोड़कर उड़ गए।
लेकिन उसी वृक्ष पर दो तोते रहते थे। उनमें से एक तोता डरते-डरते बोला—
“भाई, अब इस पेड़ पर रहना खतरे
से खाली नहीं है। चलो, उड़ चलें। कहीं और नया घर
ढूँढ़ लेंगे।”
दूसरा तोता गहरी
साँस लेकर बोला— “नहीं, मैं इस पेड़ को छोड़कर नहीं जाऊँगा। मेरी दो पीढ़ियाँ यहीं
रही हैं। यही मेरा घर है। इसे छोड़ना मेरे लिए असंभव है।”
पहला तोता बार-बार आग्रह करता रहा, मगर दूसरा तोता अपने
निर्णय पर अडिग रहा। कुछ ही दिनों में पेड़ पूरी तरह सूख गया। शाखाएँ बिखर गईं।
अंत में वह तोता भी उसी सूखे पेड़ की खोखली डाल पर निढाल होकर गिर पड़ा।
जंगल में अब उस वृक्ष का नाम “तोते वाला सूखा पेड़” पड़ गया।
👉 शिक्षा:अत्यधिक
जिद कभी-कभी जीवन को संकट में डाल देती है। समय और परिस्थिति को समझकर निर्णय लेना
ही बुद्धिमानी है।
७. हींगवाला
शब्द वाटिका
साफा = एक तरह की पगड़ी
बोहनी = पहली बिक्री
मुहावरे / कहावत
हाथ-पैर ठंडे पड़ना = बहुत डर जाना
फूट-फूटकर रोना = बहुत रोना
प्राण मुरझा जाना = व्याकुल होना, बुरी तरह डर जाना
अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत = समय
बीत जाने पर पछताने
से कोई लाभ नहीं होता...
* सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :
(१) संजाल पूर्ण करो
सावित्री
के परिवार के सदस्य
·
सावित्री और उसका पती
·
तीन बच्चे दो लडके और एक लडकी
(२) जानकारी लिखो :
१. हींगवाला : लगभग पैंतीस साल का खान नाम का आदमी गांव
गांव पैदल जाकर दूर देश से लाया हूआ हींग बेचता था।
२. सावित्री के बच्चे: सावित्री के तीन बच्चे थे। दो
लडके और एक लडकी। सावित्री के कितने प्रलोभन देने के बाद भी न मानकर काली मां की जुलूस
देखने जाते है।
१. हींगवाला सावित्री को हींग लेने का आग्रह क्यों
कर रहा था?
उत्तर: हींगवाला इसबार हेरा हींग लाया था। उसको सावित्री
की हाथ की बोहनी लगती थी। इसलिए वह सावित्री को हींग लेने का आग्रह कर रहा था।
२. दंगे की खबर सुनकर सावित्री पर हुआ परिणाम लिखो।
उत्तर: शहर में काली मां का जुलूस निकलने वाला था। नौकर
रामु के साथ लाचार होकर सावित्री अपने बच्चो को जुलूस देखने भेजा था। दिन ढल गया मगर
बच्चे न लौटे तो उसे भीतर से और बाहर से बेचैन होने लागी। सावित्री की स्थिति मानो
ऐसे हो गई जैसे – अब पछताए होत कया जब चिडिया चुग गई खेत। सडक पर से भागते हुए आदमीयो
को वह अपने बच्चो के बारे मे पुछने लगी। इतनी भीड में भला कोई मेरे बच्चो को खोजे भी
तो कैसे? पर अब वह करे भी तो कया करे? उसे अपने उपर ही क्रोध
आ रहा था।
(४) एक वाक्य में उत्तर लिखो:
१. सावित्री कहाँ बैठी थी?
उत्तर: सावित्री मौलसिरी के पेड के नीचे चबुतरे पर बैठी
थी।
२. शहर में किसका जुलूस निकलने वाला था?
उत्तर: शहर में काली मां का जुलूस निकलने वाला था।
३. सावित्री के बच्चे किसके साथ सकुशल लौट आए?
उत्तर: सावित्री के बच्चे हींगवाला खान साथ सकुशल
लौट आए।
४. खान ने सावित्री को देखते ही क्या कहा?
उत्तर: खान ने सावित्री को देखते ही कहा की, ‘‘वक्त अच्छा नही है अम्मा ! बच्चो को ऐसी भीड-भाड में बाहर
न भेजा करो ।’’
भाषा बिंदु
(अ) निम्न शब्दों से कृदंत / तद्धित बनाओ :
रोकना, हँसना, डरना, बचाना, लाचार, बच्चा, दिन, कुशल
|
क्र.
|
कृदंत |
तद्धित |
|
१. |
रोकना
– रोकनेवला |
लाचार
– लाचारी |
|
२. |
हँसना
– हँसनेवाला |
बच्चा
– बचपना |
|
३. |
डरना
– डरनेवाला |
दिन
–दैनंदिन/दैनिक |
|
४. |
बचाना
– बचानेवाला |
कुशल
– कुशलता |
(आ)
तालिका में निर्देशित कालानुसार क्रियारूप में परिवर्तन करके लिखो:
(कर्ता के अनुसार क्रिया रूप में परिवर्तन करना
अपेक्षित है ।)
सोना, करना, माँगना, देना, उठना, क्रियारूपों को इसी प्रकार सूची में लिखो।
|
क्रिया |
सामान्य वर्तमान काल |
अपूर्ण वर्तमान काल |
पूर्ण वर्तमान काल |
सामान्य भूतकाल
|
अपूर्ण भूतकाल
|
पूर्ण भूतकाल
|
सामान्य भविष्यकाल
|
अपूर्ण भविष्यकाल
|
पूर्ण भविष्यकाल
|
|
लिखना |
लिखती है। |
लिख रहा है। |
लिखा है। |
लिखा। |
लिख रहा था। |
लिखा था। |
लिखेगा। |
लिख रहा होगा। |
लिखा होगा। |
|
सोना |
सोता है। |
सो रहा है। |
सोया है। |
सो गया। |
सो रहा था। |
सोया था। |
सोएगा। |
सो रहा होगा। |
सोया होगा। |
|
करना |
करता है। |
कर रहा है। |
किया है। |
किया। |
कर रहा था। |
किया था । |
करेगा। |
कर रहा होगा। |
किया होगा। |
|
माँगना |
माँगता है |
माँग रहा है |
माँगा है |
माँगा |
माँग रहा था |
माँगा था |
माँगेगा |
माँग रहा होगा |
माँगा होगा |
|
देना |
देता है |
दे रहा है |
दिया है |
दिया |
दे रहा था |
दिया था |
देगा |
दे रहा होगा |
दिया होगा। |
|
उठना |
उठता
है |
उठ
रहा है |
उठा
है |
उठा
|
उठ
रहा था |
उठा
था |
उठेगा
|
उठ
रहा होगा |
उठा
होगा |
उपयोजित लेखन।
अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को
चार दिन की छुट्टी की माँग करने हेतु प्रार्थना पत्र लिखो ।
तारीख.
१६/०८/२०२३
राम कदम
आठवी कक्षा
प्रती,
मा. प्रधानाचार्यजी,
श्री. शिद्देश्वर
प्रशाला, तोळणूर.
अर्जदार: राम कदम, आठवी कक्षा।
विषय: चार दिन की छुट्टी की माँग करने हेतु
प्रार्थना पत्र।
महोदय,
मै अपनी पाठशाला में आठवी कक्षा का छात्र
हूं। मुझे दो दिन से अच्छा नही लग रहा है। विकनेस होने के कारण पढाई मे ध्यान नही दे
पा रहा हूं। हस्पिटल मे जाने के लिए मुझे चार दिन की छुट्टी चाहीए। इसलिए आप को विनंती
करता हूं की मुझे चार दिन की छुट्टी डिजीए। मै मित्रो की मदत से मेरी चार दीन का अभ्यास
पूर्ण कर लुंगा।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी
छात्र,
राम कदम,
८. कदम मिलाकर चलना होगा
-अटलबिहारी वाजपेयी
शब्द वाटिका
रुदन = विलाप, रुलाई
उन्नत = ऊँचा, श्रेष्ट
कल = पार्श्व , बगल
कछार = नदी के किनारे की जमीन
क्षणिक = क्षण भर रहने वाला
अरमान = इच्छा , आकांक्षा
हर्षित = प्रसन्न
श्लथ = थका हुआ, श्रांत
* सूचना के अनुसार कृतियाँ करोः-
(१) निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ लिखोः
१. अरमानों को दलना होगा।
अर्थ: ...................................................
२. पीड़ाओं में पलना होगा ।
अर्थ: जीवन मे कौन-सी भी संकट क्यों न आये हमे डगमगाकर नही चलना है। हास्य और दु:ख
में, तुफानो में, देश के लिए बलिदान देना हो, विरान मे जाना पडे, अपमान सहना पडे या हमारा सम्मान हो, हमारा मस्तक सदा
उंचा रहे ऐसा काम कर के सीना हमेशा उभरा कर हर पीडा झेलते हुए कदम मिलाकर चलना चहीए।
..................................................
(२) आकृति में दिए शब्दों की उचित जोड़ियाँ मिलाओ और तालिका में लिखोः
|
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अ |
आ |
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१. |
असंख्य |
बलिदान |
|
२. |
घोर |
घटा |
|
३. |
उन्नत |
मस्तक
|
|
4. |
क्षणिक
|
जीत |
(३) एक वाक्य में उत्तर लिखोः
१. आग की ज्वालाएँ कहाँ बरसेंगी ?
उत्तर: आग की ज्वालाएँ सिर पर बरसेंगी।
२. क्या बनकर ढलना होगा ?
उत्तर:
पावस बनकर ढलना होगा।
(अ) पद्य पाठों में आई विरुद्धार्थी शब्द जोड़ियों की सूची बनाओः
१. हास्य X रुदन २. पाँव
X हाथ ३. उद्यान X विरान
४. अपमान X सम्मान ५. उजियारा X अंधकार ६. घृणा X प्यार
७. जीत X हार ८. सफल
X असफल ९. देना
X मांगना
(आ) पाठ में प्रयुक्त अव्ययों को ढूँढ़कर उनके भेद लिखो।
शब्दों के आधार पर कहानी लिखोः
रोशनी, पलंग, पत्र, पहाड़ी
स्वयं अध्ययन
‘रेड क्रॉस सोसायटी’ के बारे में अंतरजाल से जानकारी पढ़कर लिखो।
ಎರಡನೆಯ ಸತ್ರ
१. पंपासर
- नरेश मेहता
शब्द वाटिका
बटुक जन = छोटे-छोटे बच्चे
शाल = एक प्रकार का वृक्ष
रँभाना =गाय का आवाज करना
हरीतिमा = हरियाली, हरापन
मुहावरा
टूट पड़ना = भिड़ जाना, हमला करना
* सूचना के अनुसार कृतियाँ करोः-
(१)
उत्तर लिखोः
पद्य में प्रयुक्त वृक्ष
पद्य में दो तरह के
वृक्षों के नाम दिए गए हैं।
1.शाल और सागौन
2.वट (बरगद)
ये सभी वृक्षों के
नीचे ही बड़े - बड़े ऋषि और मुनियों के आश्रम हुआ करते थे। ये आश्रम ज्ञान - व्यान, तप - आराधना के
तीर्थस्थल है। जिसके नीचे वे तपस्या किया करते थे। कवि ने अपने इस पद का नाम
पंपासार वहां की संस्कृति को देख कर रखा है।
पद्य में प्रयुक्त पुष्प =
(२) एक शब्द में उत्तर लिखोः
१. पंपा सरोवर का नाम जिसने सुना है?
उत्तर: शबरी ने कभी पंपासर का सुना था।
२. जलकलशी ले जाने वाली कौन?
उत्तर:जलकलशी ले
जाने ॠषिकन्याएँ ।
(३) प्रस्तुत कविता की किन्हीं चार पंक्तीयों का भावार्थ लिखो ।
कल्पना पल्लवन
‘वृक्ष महान दाता हैं’, स्पष्ट कीजिए।
वृक्ष मानव के चिरंतर साथी हैं, कभी वो वृक्षों की छाया में बैठकर अपनी थकन मिटाता है, तो कभी इनके मधुर फल खाकर अपनी भूख शांत करता है। तभी तो वृक्षों को मनुष्य का आश्रयदाता माना जाता है।
भाषा बिंदु
गद्य पाठों में आई संज्ञाएँ तथा विशेषण ढूँढ़कर निम्न आकृतियों में भेदों सहित लिखोः
संज्ञा =
1.फूल -
जातिवाचक
2.लकड़ी -
द्रव्यवाचक
3.गाय -
जातिवाचक
4.आम - जातिवाचक
5.हरीतिमा -
भाववाचक
विशेषण =
लाल - गुणवाचक
गीले -
गुणवाचक
कोई -
अनिश्चयवाचक सर्वनामिक
चीखे -
गुणवाचक
सींच - परिणामवाचक
उपयोजित लेखन
‘तालाब की आत्मकथा’ विषय पर निबंध लिखो ।
मैं तालाब हूं मेरे रहने का
स्थान यह धरती है जिसे मैं मां समान समझता हूं जो कि मुझे जीवन देती है. मैं पढ़ती
पर प्रत्येक स्थान पर स्थित होता हूं. कहीं जंगल में तो, कहीं
गांव में कहीं पहाड़ की चोटी पर, तो कहीं गांव के आसपास में नजर आ जाता हूँ।
मेरा अस्तित्व वर्षा, नदी, झील और झरनों से होता है. मेरा
आकार और मेरी गहराई प्रत्येक ही स्थान पर अलग-अलग होती है. मैं अपने जल से अपने
आसपास के पेड़ पौधों को जीवन देता हूं. जंगल के सभी जीव जंतुमेरे पास आकर मेरे जल
से अपनी प्यास बुझाते है। मुझे कुछ स्थानों पर पोखर और बावड़ी के नाम से भी जाना
जाता है . मेरे अंदर नदियों , झीलों और बारिश का पानी समाया होता है पुराने
जमाने में 12
महीनों
तक पानी से लबालब भरा रहता था और मेरे चारों ओर हरियाली फैलाता था . मेरा पानी
पीकर जंगल के जीव जंतु बहुत खुश होते है मैं उनके अमूल्य जीवन का प्रमुख सहारा हूं
. मेरे पानी से गांव के खेतों में सिंचाई की जाती है जिससे अच्छी फसल की पैदावार
होती है और गरीब किसान खुश रहते है . मैं कई स्थानों पर प्राकृतिक रूप से पाया
जाता हूं तो कई जगह मुझे राजा महाराजाओं द्वारा बनाया गया है . कुछ स्थानों पर मैं
छोटा होता हूं तो कुछ स्थानों पर मैं बहुत विशाल होता हूँ।
२. परोपकार –श्रीकृष्णजी
शब्द वाटिका
डंक = मधुमक्खी का जहरीला काँटा, दंश बर्र = ततैया नाम का उड़ने वाला कीड़ा
* सूचना के अनुसार कृतियाँ करोः-
(१) विशेषताएँ लिखोः
बर्र : बर्र को आपणे रंग रूपपर घमंड है। वो मनुष्य को डंख मारती है
मधुमक्खी : मधुमक्खी को लोग पालते है। मधुमक्खी से हमे मधु
प्राप्त होता है।
(२) कारण लिखोः
१. मनुष्य द्वारा प्राणी का आदर पाना - मधुमक्खी
ने बोला “ यह सच है बहन!(बर्र) तुम रंग - बिरंगी हो, उड़ती भी हो परंतु फिर भी
तुम्हारा आदर नहीं होता,
इसका कारण यह है कि कोई भी प्राणी सुंदरता के कारण नहीं, अपने
अच्छे गुणों के कारण आदर पाता है। मनुष्य उन प्राणियों का ही आदर करते हैं जो
परोपकारी होते हैं,
दूसरों को दुख नहीं पहुँचाते हैं। तुम सुंदर हो, परंतु
मनुष्य को केवल कष्ट देती हो। तुम उन्हें डंक मारती है। इसलिए अनादर पाती हो।
२. मनुष्य द्वारा प्राणी का अनादर पाना – कोई प्राणी अगर किसी को कष्ट देते है तो वो अनादर ही पाता
है। जैसे बर्र सुंदर होते हुये भी मनुष्य को केवल कष्ट देती है। लोगों को डंक मारती है। इसलिए अनादर
पाती है।
(३) एक वाक्य में उत्तर लिखोः
१. अपने रूप-रंग पर किसे घमंड था ?
उत्तर: बर्र को अपने रूप-रंग पर घमंड था।
२. लोग मधुमक्खी को क्यों पालते हैं ?
उत्तर: मधुमक्खी लोगों को हमेशा मधु देती है।
(४) इस लघुकथा से प्राप्त होने वाली सीख लिखो।
उत्तर:
प्रस्तुत पाठ में
बर्र और मधुमक्खी के द्वारा जीवन में होने वाली आदर और अनादर कर बारे में बताया
गया है कि मनुष्य को आदर उसके द्वारा किए गए व्यवहार से मिलता है। की वो अपने से
दूसरे को किस प्रकार से मदद करते है या उसे कष्ट देते हैं। ये पाठ हमे बताता है कि
हमे प्रेम तभी मिले गा जब हमारे गुण अच्छे होंगे। दूसरों के प्रति अपनी कृतज्ञता
अच्छी होगीं।
निम्नलिखित अव्ययों के भेद पहचानकर अपने वाक्यों में प्रयोग करोः
|
|
अव्यय शब्द |
भेद |
वाक्य |
|
१. |
ओर |
क्रियाविशेषण अव्यय |
अनील की ओर बैठो। |
|
२. |
वाह! |
विस्मयादिबोधक अव्यय |
वाह! क्या बात है। |
|
३. |
धीरे-धीरे |
क्रिया-विशेषण अव्यय |
राम
धीरे-धीरे चल रहे थे। |
|
४. |
लेकिन |
समुच्चयबोधक अव्यय |
पटना आना चाहता था लेकिन आ न सका। |
|
५. |
तरफ |
दिशावाचक संबंधबोधक |
परिवार की तरफ देखो कि कितने भले हैं। |
|
६. |
अरेरे! |
विस्मयादिबोधक |
अरेरे! पीछे हो जाओ , गिर जाओगे। |
|
७. |
तेज |
रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय |
राम बहुत तेज है। |
|
८. |
परन्तु |
समुच्चयबोधक अव्यय। |
राम
आया परंतु फूल नही लाया। |
उपयोजित लेखन
प्राकृतिक सौंदर्य वाले किसी चित्र का वर्णन दस-बारह पंक्तीयों में लिखो।
·
पृथ्वी ग्रह एक बहुत ही खूबसूरत जगह है, जहां बहुत सारी
हरी-भरी वनस्पतियां हैं। प्रकृति एक महान मित्र है जो हमें इस ग्रह पर रहने के लिए
सभी आवश्यक संसाधन प्रदान करती है। प्रकृति हमें पीने के लिए पानी, सांस लेने के लिए
हवा, पेट के लिए भोजन, रहने के लिए भूमि, पशु और पक्षी, पेड़ और पौधे
प्रदान करती है। इसके पारिस्थितिक संतुलन के बिना सुधार करने के लिए, इसे खराब होने का
आनंद लें।
·
हमें अपने प्राकृतिक पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए, इसे स्थिर बनाना
चाहिए और इसकी रक्षा करने के लिए इसे हमेशा स्वच्छ रखना चाहिए और इसका हमेशा आनंद
लेना चाहिए। यह सबसे सुंदर उपहार है जो भगवान ने हमें इंसानों को दिया है, और हमें इसे
नुकसान पहुंचाने के बजाय
इसका आनंद लेना चाहिए।
मैंने समझा
हिंदी साप्ताहिक पत्रिका/समाचार पत्रों से प्रेरक कथाओं का संकलन करो।
३. आत्मनिर्भरता
- आचार्य रामचंद्र शुक्ल
शब्द वाटिका
टरै = हटना, टलना
लक्ष्य = ध्येय, मंजिल
अध्यवसायी = उद्यमशील,
उत्साही
चित्तवृत्ती
= चित्त की अवस्था,
मन का भाव
* सूचना के अनुसार कृतियाँ करोः-
(१) संजाल पूर्ण करोः
तुलसीदास जी को
सर्वप्रियता और कीर्ति
प्राप्त हो ने के कारण
(२) नाम लिखोः-
१. अमेरिका महाद्वीप ढूँढ़ने वाला – कोलंबस
२. सत्य की टेक न छोड़ ने वाला – राजा सत्य हरिश्चंद्र, महाराणा प्रताप
(३) कृति पूर्ण करोः
१. ऐतिहासिक व्यक्तित्व = राजा सत्य हरिश्चंद्र, महाराणा प्रताप
२. आत्ममर्यादा के लिए आवश्यक बातें
अपने से बड़ों का सम्मान करे, छोटों और बराबरवालों से कोमलता का व्यवहार करे।
भाषा बिंदु
(अ) पाठ से विभिन्न कारकयुक्त वाक्य चुनकर तालिका बनाओ ।
(आ) कोष्ठक में दिए गए कारक चिह्नों में से उचित कारक चिह्न चुनकर वाक्य फिर से लिखो:
१. चिड़िया डाल ---- बैठी है। (पर, में, से)
उत्तर: चिड़िया डाल पर बैठी है।
२. राधा बस ---- उतर गई। (से, में, को)
उत्तर: राधा बस से उतर गई।
३. निहार के मन ---- संदेह उत्पन्न हुआ। (से, के, में)
उत्तर: निहार के मन में संदेह उत्पन्न हुआ।
४. शमा बिरयानी बनाने ---- चावल खरीद रही थी । (का, में, के लिए)
उत्तर: शमा बिरयानी बनाने के लिए चावल खरीद रही
५. चाकू ---- फल काटा। (ने, को, से)
उत्तर: चाकू से फल काटा।


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